अन्वयः
लक्ष्मण O Lakshmana, सर्वभूतानि all beings, मम me, चापगुणोन्मुक्तै: arrows released from my bow string, बाणजालैः by arrows, निरन्तरम् will have no place to move, आकाशम् sky, न उत्पतिष्यन्ति not fly.
Summary
Lakshmana no beings will be able to move in the sky, blocked by arrows released from my bowstring there will be no space left there.
पदच्छेदः
| नाकाशम् | न (अव्ययः)–आकाश (२.१) |
| उत्पतिष्यन्ति | उत्पतिष्यन्ति (√उत्-पत् लृट् प्र.पु. बहु.) |
| सर्वभूतानि | सर्व–भूत (१.३) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| चापगुणान् | चाप–गुण (२.३) |
| मुक्तैर् | मुक्त (√मुच् + क्त, ३.३) |
| बाणजालैर् | बाण–जाल (३.३) |
| निरन्तरम् | निरन्तर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ना | का | श | मु | त्प | ति | ष्य | न्ति |
| स | र्व | भू | ता | नि | ल | क्ष्म | ण |
| म | म | चा | प | गु | णा | न्मु | क्तै |
| र्बा | ण | जा | लै | र्नि | र | न्त | रम् |