अन्वयः
लक्ष्मण Lakshmana, अद्य now, मम my, नाराचैः by darts, अर्दितम् distressed, ध्वस्तभ्रान्तमृगद्विजम् समाकुलम् beasts and birds confused and destroyed, अमर्यादम् crossing all limits, जगत् world, पश्य see.
Summary
O Lakshmna now beasts and birds will be confused and destroyed by my darts.You will see them crossing all limits of propriety.
पदच्छेदः
| अर्दितं | अर्दित (√अर्दय् + क्त, २.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| नाराचैर् | नाराच (३.३) |
| ध्वस्तभ्रान्तमृगद्विजम् | ध्वस्त (√ध्वंस् + क्त)–भ्रान्त (√भ्रम् + क्त)–मृग–द्विज (२.१) |
| समाकुलम् | समाकुल (२.१) |
| अमर्यादं | अमर्याद (२.१) |
| जगत् | जगन्त् (२.१) |
| पश्याद्य | पश्य (√पश् लोट् म.पु. )–अद्य (अव्ययः) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | र्दि | तं | म | म | ना | रा | चै |
| र्ध्व | स्त | भ्रा | न्त | मृ | ग | द्वि | जम् |
| स | मा | कु | ल | म | म | र्या | दं |
| ज | ग | त्प | श्या | द्य | ल | क्ष्म | ण |