अन्वयः
मम my, क्रोधात् due to anger, त्रैलोक्ये in three worlds, विप्रणाशिते destroyed, देवाः gods, नैव भविष्यन्ति not exist, दैतेयाः demons, न not, पिशाचाः evil spirits, न not , राक्षसाः demons, न not.
Summary
My anger will destroy all the gods, demons and evil spirits. They will be extinghished from the three worlds.
पदच्छेदः
| नैव | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| देवा | देव (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| दैतेया | दैतेय (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| पिशाचा | पिशाच (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| राक्षसाः | राक्षस (१.३) |
| भविष्यन्ति | भविष्यन्ति (√भू लृट् प्र.पु. बहु.) |
| मम | मद् (६.१) |
| क्रोधात् | क्रोध (५.१) |
| त्रैलोक्ये | त्रैलोक्य (७.१) |
| विप्रणाशिते | विप्रणाशित (√विप्र-नाशय् + क्त, ७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नै | व | दे | वा | न | दै | ते | या |
| न | पि | शा | चा | न | रा | क्ष | साः |
| भ | वि | ष्य | न्ति | म | म | क्रो | धा |
| त्त्रै | लो | क्ये | वि | प्र | णा | शि | ते |