देवदानवयक्षाणां लोका ये रक्षसामपि ।
बहुधा निपतिष्यन्ति बाणौघैः शकुलीकृताः ।
निर्मर्यादानिमाँल्लोकान्करिष्याम्यद्य सायकैः ॥
देवदानवयक्षाणां लोका ये रक्षसामपि ।
बहुधा निपतिष्यन्ति बाणौघैः शकुलीकृताः ।
निर्मर्यादानिमाँल्लोकान्करिष्याम्यद्य सायकैः ॥
अन्वयः
देवदानवयक्षाणाम् of gods, demons and yakshas, रक्षसामपि demons too, ये those, लोकाः worlds, बाणौघैः by the touch of my arrows, बहुधा many times, शकलीकृता: broken into pieces, न भविष्यन्ति not survive.Summary
The worlds of gods, yakshas or even demons torn into shreds by my arrows will not survive.पदच्छेदः
| देवदानवयक्षाणां | देव–दानव–यक्ष (६.३) |
| लोका | लोक (१.३) |
| ये | यद् (१.३) |
| रक्षसाम् | रक्षस् (६.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| बहुधा | बहुधा (अव्ययः) |
| निपतिष्यन्ति | निपतिष्यन्ति (√नि-पत् लृट् प्र.पु. बहु.) |
| बाणौघैः | बाण–ओघ (३.३) |
| शकुलीकृताः | शकुलीकृत (√शकुली-कृ + क्त, १.३) |
| निर्मर्यादान् | निर्मर्याद (२.३) |
| इमांल् | इदम् (२.३) |
| लोकान् | लोक (२.३) |
| करिष्याम्य् | करिष्यामि (√कृ लृट् उ.पु. ) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| सायकैः | सायक (३.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | व | दा | न | व | य | क्षा | णां | लो | का | ये | र |
| क्ष | सा | म | पि | ब | हु | धा | नि | प | ति | ष्य | न्ति |
| बा | णौ | घैः | श | कु | ली | कृ | ताः | नि | र्म | र्या | दा |
| नि | मा | ल्लो | का | न्क | रि | ष्या | म्य | द्य | सा | य | कैः |