अन्वयः
त्वम् you, सर्वभूतानाम् of all beings, सदा always, शरण्यः a refuge, परमा गतिः ultimate resort, राघव Raghava, ते to you, दारप्रणाशम् lost track of her whereabouts, को नु who will, साधु proper, मन्येत think.
Summary
You are the ultimate resort and refuge of all beings. Who would like that your wife should be abducted ?
पदच्छेदः
| सदा | सदा (अव्ययः) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| सर्वभूतानां | सर्व–भूत (६.३) |
| शरण्यः | शरण्य (१.१) |
| परमा | परम (१.१) |
| गतिः | गति (१.१) |
| को | क (१.१) |
| नु | नु (अव्ययः) |
| दारप्रणाशं | दार–प्रणाश (२.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| साधु | साधु (२.१) |
| मन्येत | मन्येत (√मन् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| राघव | राघव (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | दा | त्वं | स | र्व | भू | ता | नां |
| श | र | ण्यः | प | र | मा | ग | तिः |
| को | नु | दा | र | प्र | णा | शं | ते |
| सा | धु | म | न्ये | त | रा | घ | व |