अन्वयः
एकस्य कृते for one's sake, लोकान् the worlds, विनाशयितुम् to destroy, नार्हसि not right, हि indeed, वसुधाधिपाः lords of the earth, युक्तदण्डाः punish the deserving, मृदवः gentle, प्रशान्ताः peaceful.
Summary
To destroy the entire world for one individual is not right. The lords of the earth should remain gentle, peaceful and punish only the deserving.
पदच्छेदः
| नैकस्य | न (अव्ययः)–एक (६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| कृते | कृत (७.१) |
| लोकान् | लोक (२.३) |
| विनाशयितुम् | विनाशयितुम् (√वि-नाशय् + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
| युक्तदण्डा | युक्त (√युज् + क्त)–दण्ड (१.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मृदवः | मृदु (१.३) |
| प्रशान्ता | प्रशान्त (√प्र-शम् + क्त, १.३) |
| वसुधाधिपाः | वसुधा–अधिप (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नै | क | स्य | तु | कृ | ते | लो | का |
| न्वि | ना | श | यि | तु | म | र्ह | सि |
| यु | क्त | द | ण्डा | हि | मृ | द | वः |
| प्र | शा | न्ता | व | सु | धा | धि | पाः |