अन्वयः
यौ whoever, धर्मौ two righteous entities, जगताम् of the worlds, नेत्रौ two eyes, यत्र where, सर्वम् all, प्रतिष्ठितम् is resting, महाबलौ two very powerful, आदित्यचन्द्रौ Sun and Moon, ग्रहणम् eclipse, अभ्युपेतौ endures.
Summary
The powerful Sun and Moon, righteous entities, who are the two eyes of these worlds and on whom everything rests firmly, also suffer eclipses sometimes.
पदच्छेदः
| यौ | यद् (१.२) |
| चेमौ | च (अव्ययः)–इदम् (१.२) |
| जगतां | जगन्त् (६.३) |
| नेत्रे | नेत्र (१.२) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| प्रतिष्ठितम् | प्रतिष्ठित (√प्रति-स्था + क्त, १.१) |
| आदित्यचन्द्रौ | आदित्य–चन्द्र (१.२) |
| ग्रहणम् | ग्रहण (२.१) |
| अभ्युपेतौ | अभ्युपेत (√अभ्युप-इ + क्त, १.२) |
| महाबलौ | महत्–बल (१.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| यौ | चे | मौ | ज | ग | तां | ने | त्रे |
| य | त्र | स | र्वं | प्र | ति | ष्ठि | तम् |
| आ | दि | त्य | च | न्द्रौ | ग्र | ह | ण |
| म | भ्यु | पे | तौ | म | हा | ब | लौ |