अन्वयः
पुरुषर्षभ O bull among men, सुमहन्ति भूतानि great beings, देवाश्च gods, सर्वभूतानि all creatures, देहिनः mortals, दैवस्य fate, न प्रमुञ्चन्ति cannot be released.
Summary
O best among men Fate spares none. Great beings, every creature, even the gods cannot escape fate.
पदच्छेदः
| सुमहान्त्य् | सु (अव्ययः)–महत् (१.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| भूतानि | भूत (१.३) |
| देवाश् | देव (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| पुरुषर्षभ | पुरुष–ऋषभ (८.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| दैवस्य | दैव (६.१) |
| प्रमुञ्चन्ति | प्रमुञ्चन्ति (√प्र-मुच् लट् प्र.पु. बहु.) |
| सर्वभूतानि | सर्व–भूत (१.३) |
| देहिनः | देहिन् (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सु | म | हा | न्त्य | पि | भू | ता | नि |
| दे | वा | श्च | पु | रु | ष | र्ष | भ |
| न | दै | व | स्य | प्र | मु | ञ्च | न्ति |
| स | र्व | भू | ता | नि | दे | हि | नः |