अन्वयः
महाप्राज्ञ very wise, ते बुद्धि: your intellect, देवैरपि gods too, दुरन्वया difficult to fathom, शोकेन by sorrow, अभिप्रसुप्तम् put to sleep, ते ज्ञानम् your wisdom, अहम् I am, सम्बोधयामि arousing you.
Summary
Even gods cannot fathom your intellect. I am only trying to rouse your wisdom your sorrow has sent to sleep.
पदच्छेदः
| बुद्धिश् | बुद्धि (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| महाप्राज्ञ | महत्–प्राज्ञ (८.१) |
| देवैर् | देव (३.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| दुरन्वया | दुरन्वय (१.१) |
| शोकेनाभिप्रसुप्तं | शोक (३.१)–अभिप्रसुप्त (√अभिप्र-स्वप् + क्त, २.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| ज्ञानं | ज्ञान (२.१) |
| संबोधयाम्य् | संबोधयामि (√सम्-बोधय् लट् उ.पु. ) |
| अहम् | मद् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| बु | द्धि | श्च | ते | म | हा | प्रा | ज्ञ |
| दे | वै | र | पि | दु | र | न्व | या |
| शो | के | ना | भि | प्र | सु | प्तं | ते |
| ज्ञा | नं | सं | बो | ध | या | म्य | हम् |