अन्वयः
भरतस्य Bharata's, यथा as, श्रुतम् heard, महीपतिः lord of the earth, राजा king, तव your, गुणैः virtues, बद्धः bound, त्वद्वियोगात् by your separation, देवत्वम् godhood, आपन्नः attained.
Summary
King Dasaratha, impelled by your virtues, and separation from you attained godhood as heard from Bharata.
पदच्छेदः
| तव | त्वद् (६.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| गुणैर् | गुण (३.३) |
| बद्धस् | बद्ध (√बन्ध् + क्त, १.१) |
| त्वद्वियोगान् | त्वद्–वियोग (५.१) |
| महीपतिः | महीपति (१.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| देवत्वम् | देव–त्व (२.१) |
| आपन्नो | आपन्न (√आ-पद् + क्त, १.१) |
| भरतस्य | भरत (६.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| श्रुतम् | श्रुत (√श्रु + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | व | चै | व | गु | णै | र्ब | द्ध |
| स्त्व | द्वि | यो | गा | न्म | ही | प | तिः |
| रा | जा | दे | व | त्व | मा | प | न्नो |
| भ | र | त | स्य | य | था | श्रु | तम् |