अन्वयः
काकुत्स्थ O Rama, प्राप्तम् has befallen, इदं दुःखम् this sorrow, न सहिष्यसे यदि not able to bear, प्राकृतः ordinary man, अल्पसत्त्वश्च with little strength, इतरः ordinary man, कः who, सहिष्यति will be able to bear?
Summary
O Rama, if you cannot bear this sorrow that has befallen you, how can weak and ordinary persons endure (such suffering)?
पदच्छेदः
| यदि | यदि (अव्ययः) |
| दुःखम् | दुःख (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| प्राप्तं | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, २.१) |
| काकुत्स्थ | काकुत्स्थ (८.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| सहिष्यसे | सहिष्यसे (√सह् लृट् म.पु. ) |
| प्राकृतश् | प्राकृत (१.१) |
| चाल्पसत्त्वश् | च (अव्ययः)–अल्प–सत्त्व (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| इतरः | इतर (१.१) |
| कः | क (१.१) |
| सहिष्यति | सहिष्यति (√सह् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | दि | दुः | ख | मि | दं | प्रा | प्तं |
| का | कु | त्स्थ | न | स | हि | ष्य | से |
| प्रा | कृ | त | श्चा | ल्प | स | त्त्व | श्च |
| इ | त | रः | कः | स | हि | ष्य | ति |