अन्वयः
एषः so, लोकस्वभावः एव it is natural order in the world, नहुषात्मजः Nahusha's son, ययातिः Yayati, शक्रेण to Indra, सालोक्यम् sharing his stay in the same world, गतः attached, अनयः curse, तम् him, समस्पृशत् touched .
Summary
It is the go of the world. Yayati, son of Nahusa, shared heaven with Indra but because of his curse (for his bad conduct) suffered misfortune.
पदच्छेदः
| लोकस्वभाव | लोक–स्वभाव (१.१) |
| एवैष | एव (अव्ययः)–एतद् (१.१) |
| ययातिर् | ययाति (१.१) |
| नहुषात्मजः | नहुषात्मज (१.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| शक्रेण | शक्र (३.१) |
| सालोक्यम् | सालोक्य (२.१) |
| अनयस् | अनय (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| समस्पृशत् | समस्पृशत् (√सम्-स्पृश् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| लो | क | स्व | भा | व | ए | वै | ष |
| य | या | ति | र्न | हु | षा | त्म | जः |
| ग | तः | श | क्रे | ण | सा | लो | क्य |
| म | न | य | स्तं | स | म | स्पृ | शत् |