अन्वयः
महर्षिः sage, यः who, वसिष्ठः Vasistha, यः that, नः पितुः our father's, पुरोहितः priest, अस्य his, अह्ना one day, पुत्रशतम् one hundred sons, जज्ञे gave birth to, पुनः again, तथैव in the same way, हतम् killed.
Summary
To sage Vasistha, our father's priest, were born a hundred sons in a day.But all of them were killed in one day the same way.
पदच्छेदः
| महर्षयो | महत्–ऋषि (१.३) |
| वसिष्ठस् | वसिष्ठ (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| यः | यद् (१.१) |
| पितुर् | पितृ (६.१) |
| नः | मद् (६.३) |
| पुरोहितः | पुरोहित (१.१) |
| अह्ना | अहर् (३.१) |
| पुत्रशतं | पुत्र–शत (२.१) |
| जज्ञे | जज्ञे (√जन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तथैवास्य | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–इदम् (६.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| हतम् | हत (√हन् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | ह | र्ष | यो | व | सि | ष्ठ | स्तु |
| यः | पि | तु | र्नः | पु | रो | हि | तः |
| अ | ह्ना | पु | त्र | श | तं | ज | ज्ञे |
| त | थै | वा | स्य | पु | न | र्ह | तम् |