अन्वयः
सारग्राही who can grasp the essence, राघवः Rama, पूर्वज अपि being elder, लक्ष्मणेन by Lakshmana, उक्तमात्रः तु only when told by, महासारम् the great essence, सुभाषितम् wise counsel, प्रतिजग्राह accepted.
Summary
Even though Rama was elder, he could grasp the quintessence of the wise counsel only after Lakshmana had said it.
पदच्छेदः
| पूर्वजो | पूर्वज (१.१) |
| ऽप्य् | अपि (अव्ययः) |
| उक्तमात्रस् | उक्त (√वच् + क्त)–मात्र (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| लक्ष्मणेन | लक्ष्मण (३.१) |
| सुभाषितम् | सुभाषित (२.१) |
| सारग्राही | सार–ग्राहिन् (१.१) |
| महासारं | महत्–सार (२.१) |
| प्रतिजग्राह | प्रतिजग्राह (√प्रति-ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राघवः | राघव (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पू | र्व | जो | ऽप्यु | क्त | मा | त्र | स्तु |
| ल | क्ष्म | णे | न | सु | भा | षि | तम् |
| सा | र | ग्रा | ही | म | हा | सा | रं |
| प्र | ति | ज | ग्रा | ह | रा | घ | वः |