अन्वयः
अहम् I, सीताम् Sita, अभ्यवपन्नः descended down, मया by me, रावणश्च Ravana, विध्वंसितरथः with his chariot destroyed, अत्र in this place, धरणीतले on this ground, पातितः I fell down.
Summary
I descended down to protect Sita, and in the battle with Ravana his chariot destroyed fell down here on the ground.
पदच्छेदः
| सीताम् | सीता (२.१) |
| अभ्यवपन्नो | अभ्यवपन्न (√अभ्यव-पद् + क्त, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| रावणश् | रावण (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| रणे | रण (७.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| विध्वंसितरथच्छत्त्रः | विध्वंसित (√वि-ध्वंसय् + क्त)–रथ–छत्त्र (१.१) |
| पातितो | पातित (√पातय् + क्त, १.१) |
| धरणीतले | धरणी–तल (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सी | ता | म | भ्य | व | प | न्नो | ऽहं |
| रा | व | ण | श्च | र | णे | म | या |
| वि | ध्वं | सि | त | र | थ | च्छ | त्रः |
| पा | ति | तो | ध | र | णी | त | ले |