अन्वयः
येन मया by me this way, इयम् this kind, महती great, व्यसनवागुरा snare of misfortunes, प्राप्ता attained, मत्तः more than me, अभाग्यतरः more unlucky, सचराचरे among animate and inanimate, अस्मिन् in this, लोके world, नास्ति not there.
Summary
In this world of the animate and the inanimate there is no one more unfortunate than me fallen into the trap of adversities.
पदच्छेदः
| नास्त्य् | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| अभाग्यतरो | अभाग्यतर (१.१) |
| लोके | लोक (७.१) |
| मत्तो | मद् (५.१) |
| ऽस्मिन् | इदम् (७.१) |
| सचराचरे | सचराचर (७.१) |
| येनेयं | यद् (३.१)–इदम् (१.१) |
| महती | महत् (१.१) |
| प्राप्ता | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| व्यसनवागुरा | व्यसन–वागुरा (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ना | स्त्य | भा | ग्य | त | रो | लो | के |
| म | त्तो | ऽस्मि | न्स | च | रा | च | रे |
| ये | ने | यं | म | ह | ती | प्रा | प्ता |
| म | या | व्य | स | न | वा | गु | रा |