अन्वयः
राघवः Rama, इत्येवम् in this manner, बहुशः many times, उक्त्वा after telling, सहलक्ष्मणः along with Lakshmana, पितृस्नेहम् filiat affection, विदर्शयन् showing, जटायुषम् Jatayu, पस्पर्श caressed.
Summary
Saying such words and showing filial affection, he caressed Jatayu repeatedly with Lakshmana.
पदच्छेदः
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| बहुशो | बहुशस् (अव्ययः) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| सहलक्ष्मणः | सहलक्ष्मण (१.१) |
| जटायुषं | जटायुष (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| पस्पर्श | पस्पर्श (√स्पृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पितृस्नेहं | पितृ–स्नेह (२.१) |
| निदर्शयन् | निदर्शयत् (√नि-दर्शय् + शतृ, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्ये | व | मु | क्त्वा | ब | हु | शो |
| रा | घ | वः | स | ह | ल | क्ष्म | णः |
| ज | टा | यु | षं | च | प | स्प | र्श |
| पि | तृ | स्ने | हं | नि | द | र्श | यन् |