ब्रूहि ब्रूहीति रामस्य ब्रुवाणस्य कृताञ्जलेः ।
त्यक्त्वा शरीरं गृध्रस्य जग्मुः प्राणा विहायसं ॥
ब्रूहि ब्रूहीति रामस्य ब्रुवाणस्य कृताञ्जलेः ।
त्यक्त्वा शरीरं गृध्रस्य जग्मुः प्राणा विहायसं ॥
अन्वयः
कृताञ्जलेः waiting with folded palms, रामस्य Rama's, ब्रुहि ब्रुहि इति saying 'tell me, tell me', ब्रुवाणस्य as he spoke so, गृध्रस्य of the vulture, प्राणाः life, शरीरम् body, त्वक्त्वा after leaving, विहायसम् to the sky, जग्मुः went.Summary
As Rama was saying to the vulture with folded palms 'Tell me, tell me'( about Ravana) the life breath of the vulture soared into the sky leaving the body.पदच्छेदः
| ब्रूहि | ब्रूहि (√ब्रू लोट् म.पु. ) |
| ब्रूहीति | ब्रूहि (√ब्रू लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| ब्रुवाणस्य | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, ६.१) |
| कृताञ्जलेः | कृत (√कृ + क्त)–अञ्जलि (६.१) |
| त्यक्त्वा | त्यक्त्वा (√त्यज् + क्त्वा) |
| शरीरं | शरीर (२.१) |
| गृध्रस्य | गृध्र (६.१) |
| जग्मुः | जग्मुः (√गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| प्राणा | प्राण (१.३) |
| विहायसम् | विहायस् (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्रू | हि | ब्रू | ही | ति | रा | म | स्य |
| ब्रु | वा | ण | स्य | कृ | ता | ञ्ज | लेः |
| त्य | क्त्वा | श | री | रं | गृ | ध्र | स्य |
| ज | ग्मुः | प्रा | णा | वि | हा | य | सं |