अन्वयः
तत् that, यत् whatever, द्विजातयः brahmins, प्रेतस्य for the dead, मर्त्यस्य for a mortal, स्वर्गगमनम् for ascending to heaven, कथयन्ति they utter, तत् all that, पित्र्यम् pertaining to father, तस्य that, जजाप muttered.
Summary
Rama muttered the mantras recommended by brahmins for dead mortals as one would do for his father, to help him ascend to heaven.
पदच्छेदः
| यत् | यद् (२.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| प्रेतस्य | प्रेत (√प्र-इ + क्त, ६.१) |
| मर्त्यस्य | मर्त्य (६.१) |
| कथयन्ति | कथयन्ति (√कथय् लट् प्र.पु. बहु.) |
| द्विजातयः | द्विजाति (१.३) |
| तत् | तद् (२.१) |
| स्वर्गगमनं | स्वर्ग–गमन (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| क्षिप्रं | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| रामो | राम (१.१) |
| जजाप | जजाप (√जप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | त्त | त्प्रे | त | स्य | म | र्त्य | स्य |
| क | थ | य | न्ति | द्वि | जा | त | यः |
| त | त्स्व | र्ग | ग | म | नं | त | स्य |
| क्षि | प्रं | रा | मो | ज | जा | प | ह |