स गृध्रराजः कृतवान्यशस्करं; सुदुष्करं कर्म रणे निपातितः ।
महर्षिकल्पेन च संस्कृतस्तदा; जगाम पुण्यां गतिमात्मनः शुभाम् ॥
स गृध्रराजः कृतवान्यशस्करं; सुदुष्करं कर्म रणे निपातितः ।
महर्षिकल्पेन च संस्कृतस्तदा; जगाम पुण्यां गतिमात्मनः शुभाम् ॥
अन्वयः
रणे in battle, सुदुष्करम् very difficult feat, यशस्करम् glorious, कर्म deed, कृतवान् done, निपातितः was made to fall, सः गृध्रराजः that lord of the vultures, तदा then, महर्षिकल्पेन following the prescription of sages, संस्कृतः sanctified, पुण्याम् holy, शुभाम् auspicious, आत्मनः his, गतिम् state, जगाम reached.Summary
The king of vultures had performed a very difficult and glorious feat by laying down his life fighting. Sanctified by Rama's offering as laid down in scriptures by the seers, he attained a holy, auspicious and divine state of the self.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| गृध्रराजः | गृध्र–राज (१.१) |
| कृतवान् | कृतवत् (√कृ + क्तवतु, १.१) |
| यशस्करं | यशस्कर (२.१) |
| सुदुष्करं | सु (अव्ययः)–दुष्कर (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| रणे | रण (७.१) |
| निपातितः | निपातित (√नि-पातय् + क्त, १.१) |
| महर्षिकल्पेन | महत्–ऋषि–कल्प (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| संस्कृतस् | संस्कृत (√संस्-कृ + क्त, १.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पुण्यां | पुण्य (२.१) |
| गतिम् | गति (२.१) |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) |
| शुभाम् | शुभ (२.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | गृ | ध्र | रा | जः | कृ | त | वा | न्य | श | स्क | रं |
| सु | दु | ष्क | रं | क | र्म | र | णे | नि | पा | ति | तः |
| म | ह | र्षि | क | ल्पे | न | च | सं | स्कृ | त | स्त | दा |
| ज | गा | म | पु | ण्यां | ग | ति | मा | त्म | नः | शु | भाम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||