अन्वयः
अनन्तरम् incessantly, दीनात्मा a piteous soul, जटायुः Jatayu, विलपन्तम् wailing, रामम् to Rama, उद्वीक्ष्य seeing, अथ this, अतिसन्नया in a faint voice, वाचा spoke, इदम् these, अब्रवीत् said.
Summary
Thereafter Jatayu, a piteous soul, looked up at Rama who was crying incessantly and said this in a feeble voice:
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| उद्वीक्ष्याथ | उद्वीक्ष्य (√उद्वि-ईक्ष् + ल्यप्)–अथ (अव्ययः) |
| दीनात्मा | दीन–आत्मन् (१.१) |
| विलपन्तम् | विलपत् (√वि-लप् + शतृ, २.१) |
| अनन्तरम् | अनन्तर (२.१) |
| वाचातिसन्नया | वाच् (३.१)–अतिसन्न (३.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| जटायुर् | जटायुस् (१.१) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मु | द्वी | क्ष्या | थ | दी | ना | त्मा |
| वि | ल | प | न्त | म | न | न्त | रम् |
| वा | चा | ति | स | न्न | या | रा | मं |
| ज | टा | यु | रि | द | म | ब्र | वीत् |