पुरा राम महाबाहो महाबलपराक्रम ।
रूपमासीन्ममाचिन्त्यं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ।
यथा सोमस्य शक्रस्य सूर्यस्य च यथा वपुः ॥
पुरा राम महाबाहो महाबलपराक्रम ।
रूपमासीन्ममाचिन्त्यं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ।
यथा सोमस्य शक्रस्य सूर्यस्य च यथा वपुः ॥
अन्वयः
महाबाहो longarmed, महाबलपराक्रम strong and powerful, राम O Rama, पुरा in the past, सोमस्य the Moon's, शक्रस्य Indra's, यथा as, सूर्यस्य च the Sun's, वपुः body, यथा like that, मम my,रूपम् form, अचिन्त्यम् inconceivable, त्रिषु लोकेषु in the three worlds, विश्रुतम् renowned, आसीत् it was.M N Dutt
O Mighty armed Rāma of great prowess, formerly my beauty, beyond conception, was known all over the three worlds, like to the beauty of the Sun, the Moon and Indra. I used to frighten everywhere the ascetics living in the forest by turning this my beauty into a terrific form.Summary
O longarmed, mighty and powerful Rama in the past I was handsome like the Moon or Indra or the Sun inconceivable to all the three worlds.पदच्छेदः
| पुरा | पुरा (अव्ययः) |
| राम | राम (८.१) |
| महाबाहो | महत्–बाहु (८.१) |
| महाबलपराक्रम | महत्–बल–पराक्रम (८.१) |
| रूपम् | रूप (१.१) |
| आसीन् | आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| ममाचिन्त्यं | मद् (६.१)–अचिन्त्य (१.१) |
| त्रिषु | त्रि (७.३) |
| लोकेषु | लोक (७.३) |
| विश्रुतम् | विश्रुत (√वि-श्रु + क्त, १.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| सोमस्य | सोम (६.१) |
| शक्रस्य | शक्र (६.१) |
| सूर्यस्य | सूर्य (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| वपुः | वपुस् (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | रा | रा | म | म | हा | बा | हो | म | हा | ब | ल |
| प | रा | क्र | म | रू | प | मा | सी | न्म | मा | चि | न्त्यं |
| त्रि | षु | लो | के | षु | वि | श्रु | तम् | य | था | सो | म |
| स्य | श | क्र | स्य | सू | र्य | स्य | च | य | था | व | पुः |