दिव्यमस्ति न मे ज्ञानं नाभिजानामि मैथिलीम् ।
यस्तां ज्ञास्यति तं वक्ष्ये दग्धः स्वं रूपमास्थितः ॥
दिव्यमस्ति न मे ज्ञानं नाभिजानामि मैथिलीम् ।
यस्तां ज्ञास्यति तं वक्ष्ये दग्धः स्वं रूपमास्थितः ॥
अन्वयः
मे to me, दिव्यम् divine, ज्ञानम् wisdom, नास्ति I do not have, मैथिलीम् Maithili, नाभिजानामि I do not know, दग्धः burnt one, स्वं रूम् my original form, आस्थितः getting, ताम् her, यः whoever, ज्ञास्यति know of her, तम् him, वक्ष्ये I will reveal.M N Dutt
I am not gifted with divine fore-sight and therefore do not know where Maithilī is. I shall let you know of him who shall be able to tell you all about her, after I resume my original shape, being burnt (by you). I shall furthermore tell you, O Rāma, who knows that Räksasa.Summary
I do not have divine wisdom (now). Nor do I know Sita. When you cremate me, I shall assume my original form and will tell you the name of the person who knows it.पदच्छेदः
| दिव्यम् | दिव्य (१.१) |
| अस्ति | अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| न | न (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| ज्ञानं | ज्ञान (१.१) |
| नाभिजानामि | न (अव्ययः)–अभिजानामि (√अभि-ज्ञा लट् उ.पु. ) |
| मैथिलीम् | मैथिली (२.१) |
| यस् | यद् (१.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| ज्ञास्यति | ज्ञास्यति (√ज्ञा लृट् प्र.पु. एक.) |
| तं | तद् (२.१) |
| वक्ष्ये | वक्ष्ये (√वच् लृट् उ.पु. ) |
| दग्धः | दग्ध (√दह् + क्त, १.१) |
| स्वं | स्व (२.१) |
| रूपम् | रूप (२.१) |
| आस्थितः | आस्थित (√आ-स्था + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | व्य | म | स्ति | न | मे | ज्ञा | नं |
| ना | भि | जा | ना | मि | मै | थि | लीम् |
| य | स्तां | ज्ञा | स्य | ति | तं | व | क्ष्ये |
| द | ग्धः | स्वं | रू | प | मा | स्थि | तः |