अन्वयः
अरिन्दम O subduer of enemies, राघव Rama, सहस्रांशुः the god of a thousand rays, सूर्यः Sun, यावत् so far, प्रतपति radiates, लोके in the world, तस्य his, अविदितम् unknown, किञ्चित् hardly anything, नास्ति हि is not.
M N Dutt
There is no place under the sun of many rays, O Rāghava, O slayer of foes, unknown to him.
Summary
There is nothing unknown to Sugriva in this world as far as the Sun shines, O subduer of enemies
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| तस्याविदितं | तद् (६.१)–अविदित (१.१) |
| लोके | लोक (७.१) |
| किंचिद् | कश्चित् (१.१) |
| अस्ति | अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| राघव | राघव (८.१) |
| यावत् | यावत् (अव्ययः) |
| सूर्यः | सूर्य (१.१) |
| प्रतपति | प्रतपति (√प्र-तप् लट् प्र.पु. एक.) |
| सहस्रांशुर् | सहस्रांशु (१.१) |
| अरिंदम | अरिंदम (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | त | स्या | वि | दि | तं | लो | के |
| किं | चि | द | स्ति | हि | रा | घ | व |
| या | व | त्सू | र्यः | प्र | त | प | ति |
| स | ह | स्रां | शु | र | रिं | द | म |