ऋष्यमूकस्तु पम्पायाः पुरस्तात्पुष्पितद्रुमः ।
सुदुःखारोहणो नाम शिशुनागाभिरक्षितः ।
उदारो ब्रह्मणा चैव पूर्वकाले विनिर्मितः ॥
ऋष्यमूकस्तु पम्पायाः पुरस्तात्पुष्पितद्रुमः ।
सुदुःखारोहणो नाम शिशुनागाभिरक्षितः ।
उदारो ब्रह्मणा चैव पूर्वकाले विनिर्मितः ॥
अन्वयः
पम्पायाः Pampa's, पुरस्तात् before, पुष्पितद्रुमः trees with flowers in bloom, सुदुःखारोहणः quite difficult to climb, शिशुनागाभिरक्षितः protected by young elephants, उदारः exalted, ब्रह्मणा by Brahma, ऋष्यमूकश्च Rishyamuka, पूर्वकाले in the past, विनिर्मितः is created.M N Dutt
There stands in front of Pampă the highly inaccessible mount Rşyamūka, ornamented with many a blossoming tree and guarded on all sides by little serpents. That mount is highly munificent. It was created by Brahmā in the days of yore.Summary
Mount Rishyamuka situated on the bank of Pampa has trees filled with blossoms. It is difficult to climb and is protected by young elephants.This lofty mountain was created by Brahma in olden days.पदच्छेदः
| ऋष्यमूकस् | ऋष्यमूक (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| पम्पायाः | पम्पा (६.१) |
| पुरस्तात् | पुरस्तात् (अव्ययः) |
| पुष्पितद्रुमः | पुष्पित–द्रुम (१.१) |
| सुदुःखारोहणो | सु (अव्ययः)–दुःख–आरोहण (१.१) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| शिशुनागाभिरक्षितः | शिशुनाग–अभिरक्षित (√अभि-रक्ष् + क्त, १.१) |
| उदारो | उदार (१.१) |
| ब्रह्मणा | ब्रह्मन् (३.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| पूर्वकाले | पूर्व–काल (७.१) |
| विनिर्मितः | विनिर्मित (√विनिर्-मा + क्त, १.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋ | ष्य | मू | क | स्तु | प | म्पा | याः | पु | र | स्ता | त्पु |
| ष्पि | त | द्रु | मः | सु | दुः | खा | रो | ह | णो | ना | म |
| शि | शु | ना | गा | भि | र | क्षि | तः | उ | दा | रो | ब्र |
| ह्म | णा | चै | व | पू | र्व | का | ले | वि | नि | र्मि | तः |