तौ शैलेष्वाचितानेकान्क्षौद्रकल्पफलद्रुमान् ।
वीक्षन्तौ जग्मतुर्द्रष्टुं सुग्रीवं रामलक्ष्मणौ ॥
तौ शैलेष्वाचितानेकान्क्षौद्रकल्पफलद्रुमान् ।
वीक्षन्तौ जग्मतुर्द्रष्टुं सुग्रीवं रामलक्ष्मणौ ॥
अन्वयः
तौ रामलक्ष्मणौ Rama and Lakshmana, शैलेषु in the mountain, आचितान् loaded with, क्षौद्रकल्पफलान् honey like fruits, द्रुमान् trees, वीक्षन्तौ seeing, सुग्रीवम् Sugriva, द्रष्टुम् to see, जग्मतुः both went.M N Dutt
They wending their way desirous of seeing Sugrīva, there came within the compass of their vision many trees, grown on the summits of the mountains, blossoming with flowers and abounding in fruits tasting sweet like to honey.Summary
Observing the trees loaded with honeysweet fruits on the mountain, Rama and Lakshmana went to see Sugriva.पदच्छेदः
| तौ | तद् (१.२) |
| शैलेष्व् | शैल (७.३) |
| आचितानेकान् | आचित (√आ-चि + क्त)–अनेक (२.३) |
| क्षौद्रकल्पफलद्रुमान् | क्षौद्र–कल्प–फल–द्रुम (२.३) |
| वीक्षन्तौ | वीक्षत् (√वि-ईक्ष् + शतृ, १.२) |
| जग्मतुर् | जग्मतुः (√गम् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| द्रष्टुं | द्रष्टुम् (√दृश् + तुमुन्) |
| सुग्रीवं | सुग्रीव (२.१) |
| रामलक्ष्मणौ | राम–लक्ष्मण (१.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तौ | शै | ले | ष्वा | चि | ता | ने | का |
| न्क्षौ | द्र | क | ल्प | फ | ल | द्रु | मान् |
| वी | क्ष | न्तौ | ज | ग्म | तु | र्द्र | ष्टुं |
| सु | ग्री | वं | रा | म | ल | क्ष्म | णौ |