अन्वयः
सः तु that sage, तत् that, शस्त्रम् weapon, अनुप्राप्य having received, आत्मनः his own, प्रत्ययम् trust, रक्षन् while keeping, न्यासरक्षणतत्परः always attentive in protecting that deposit, वने in the forest, विचरत्येव went wandering.
M N Dutt
Receiving that weapon, that ascetic intent upon preserving his trust, range the forest, maintaining his faith.
Summary
Having received the weapon as a trust, the sage went wandering in the forest, always attentive in safeguarding the weapon.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तच् | तद् (२.१) |
| छस्त्रम् | शस्त्र (२.१) |
| अनुप्राप्य | अनुप्राप्य (√अनुप्र-आप् + ल्यप्) |
| न्यासरक्षणतत्परः | न्यास–रक्षण–तत्पर (१.१) |
| वने | वन (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| विचरत्य् | विचरति (√वि-चर् लट् प्र.पु. एक.) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| रक्षन् | रक्षत् (√रक्ष् + शतृ, १.१) |
| प्रत्ययम् | प्रत्यय (२.१) |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | त | च्छ | स्त्र | म | नु | प्रा | प्य |
| न्या | स | र | क्ष | ण | त | त्प | रः |
| व | ने | तु | वि | च | र | त्ये | व |
| र | क्ष | न्प्र | त्य | य | मा | त्म | नः |