सर्वैरेव समागम्य वागियं समुदाहृता ।
राक्षसैर्दण्डकारण्ये बहुभिः कामरूपिभिः ।
अर्दिताः स्म भृशं राम भवान्नस्त्रातुमर्हति ॥
सर्वैरेव समागम्य वागियं समुदाहृता ।
राक्षसैर्दण्डकारण्ये बहुभिः कामरूपिभिः ।
अर्दिताः स्म भृशं राम भवान्नस्त्रातुमर्हति ॥
अन्वयः
राम O Rama, दण्डकारण्ये in Dandaka forest, बहुभिः by many, कामरूपिभिः assuming forms at will राक्षसैः by demons, दृढम् strongly, (cruelly) अर्दिताः are tormented, स्म we are, भवान् you, तत्र for that reason, नः us, रक्षतु may protect.M N Dutt
Thereat all those that had come, said, We have been, O Rāma, immensely harassed in the forest of Dandaka by Räkşasas wearing shapes at will. Do you deliver us.Summary
'O Rama, the demons who can assume any form at their will are mercilessly tormenting us in Dandaka forest. Do protect us from them'.पदच्छेदः
| सर्वैर् | सर्व (३.३) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| समागम्य | समागम्य (√समा-गम् + ल्यप्) |
| वाग् | वाच् (१.१) |
| इयं | इदम् (१.१) |
| समुदाहृता | समुदाहृत (√समुदा-हृ + क्त, १.१) |
| राक्षसैर् | राक्षस (३.३) |
| दण्डकारण्ये | दण्डक–अरण्य (७.१) |
| बहुभिः | बहु (३.३) |
| कामरूपिभिः | कामरूपिन् (३.३) |
| अर्दिताः | अर्दित (√अर्दय् + क्त, १.३) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| भृशं | भृशम् (अव्ययः) |
| राम | राम (८.१) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| नस् | मद् (२.३) |
| त्रातुम् | त्रातुम् (√त्रा + तुमुन्) |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्वै | रे | व | स | मा | ग | म्य | वा | गि | यं | स |
| मु | दा | हृ | ता | रा | क्ष | सै | र्द | ण्ड | का | र | ण्ये |
| ब | हु | भिः | का | म | रू | पि | भिः | अ | र्दि | ताः | स्म |
| भृ | शं | रा | म | भ | वा | न्न | स्त्रा | तु | म | र्ह | ति |