अन्वयः
मूलफलाशनाः living on roots and fruits, धर्मनिरताः engaged in righteous activition वने in the forest, वसन्तः residing, क्रूरकर्मभिः by cruel activities, राक्षसैः by demons, भीताः are afraid, सुखम् happiness, न लभन्ते do not get.
Summary
The sages living in the forest, eating roots and fruits and ever engaged in righteous activities are afraid of the depredations of the demons, with their happiness gone.
पदच्छेदः
| वसन्तो | वसत् (√वस् + शतृ, १.३) |
| धर्मनिरता | धर्म–निरत (√नि-रम् + क्त, १.३) |
| वने | वन (७.१) |
| मूलफलाशनाः | मूल–फल–अशन (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| लभन्ते | लभन्ते (√लभ् लट् प्र.पु. बहु.) |
| सुखं | सुख (२.१) |
| भीता | भीत (√भी + क्त, १.३) |
| राक्षसैः | राक्षस (३.३) |
| क्रूरकर्मभिः | क्रूर–कर्मन् (३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| व | स | न्तो | ध | र्म | नि | र | ता |
| व | ने | मू | ल | फ | ला | श | नाः |
| न | ल | भ | न्ते | सु | खं | भी | ता |
| रा | क्ष | सैः | क्रू | र | क | र्म | भिः |