अन्वयः
काले काले at all times, विविधैः by different, नियमैः traditions, निरताः totally involved, वने in the forest, नरमांसोपजीविभिः living on human flesh (as cannibals), भीमैः by dreadful, राक्षसैः demons, भक्ष्यन्ते are eaten.
Summary
The sages engrossed in various austerities in the forest have been victims to the dreadful demons living on human flesh.
पदच्छेदः
| काले | काल (७.१) |
| काले | काल (७.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| निरता | निरत (√नि-रम् + क्त, १.३) |
| नियमैर् | नियम (३.३) |
| विविधैर् | विविध (३.३) |
| वने | वन (७.१) |
| भक्ष्यन्ते | भक्ष्यन्ते (√भक्ष् प्र.पु. बहु.) |
| राक्षसैर् | राक्षस (३.३) |
| भीमैर् | भीम (३.३) |
| नरमांसोपजीविभिः | नर–मांस–उपजीविन् (३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| का | ले | का | ले | च | नि | र | ता |
| नि | य | मै | र्वि | वि | धै | र्व | ने |
| भ | क्ष्य | न्ते | रा | क्ष | सै | र्भी | मै |
| र्न | र | मां | सो | प | जी | वि | भिः |