अन्वयः
नित्यम् always, चक्रवाकयुता full of Chakravaka birds, चित्रप्रस्थवनान्तरा with wonderful forestland, सलिलार्थिभिः those wishing to have water, मातङ्गमृगयूथैश्च by herds of elephants and deer, शोभते looks very beautiful
Summary
'Frequented by the Chakravakas and surrounded by the wonderful forest with thirsty elephants and deer this Pampa looks beautiful.
पदच्छेदः
| चक्रवाकयुता | चक्रवाक–युत (१.१) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| चित्रप्रस्थवनान्तरा | चित्र–प्रस्थ–वन–अन्तर (१.१) |
| मातंगमृगयूथैश् | मातंग–मृग–यूथ (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| शोभते | शोभते (√शुभ् लट् प्र.पु. एक.) |
| सलिलार्थिभिः | सलिल–अर्थिन् (३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| च | क्र | वा | क | यु | ता | नि | त्यं |
| चि | त्र | प्र | स्थ | व | ना | न्त | रा |
| मा | त | ङ्ग | मृ | ग | यू | थै | श्च |
| शो | भ | ते | स | लि | ला | र्थि | भिः |