तावृष्यमूकं सहितौ प्रयातौ; सुग्रीवशाखामृगसेवितं तम् ।
त्रस्तास्तु दृष्ट्वा हरयो बभूवु;र्महौजसौ राघवलक्ष्मणौ तौ ॥
तावृष्यमूकं सहितौ प्रयातौ; सुग्रीवशाखामृगसेवितं तम् ।
त्रस्तास्तु दृष्ट्वा हरयो बभूवु;र्महौजसौ राघवलक्ष्मणौ तौ ॥
अन्वयः
महौजसौ of great strength, तौ both, राघवलक्ष्मणौ Rama and Lakshmana, दृष्ट्वा after seeing, त्रस्ताः frightened, हरयः monkeys, पुण्यसुखम् sacred and safe, शरण्यम् a refugees, सदैव always, शाखामृगसेवितान्तम् a restingplace for monkeys, तम् such, आश्रमम् hermitage, अभिजग्मुः went.Summary
Having seen the mighty Rama and Lakshmana, all other monkeys got frightened and ran into a sacred and safe hermitage.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे प्रथमस्सर्गः॥Thus ends the first sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| ताव् | तद् (१.२) |
| ऋष्यमूकं | ऋष्यमूक (२.१) |
| सहितौ | सहित (१.२) |
| प्रयातौ | प्रयात (√प्र-या + क्त, १.२) |
| सुग्रीवशाखामृगसेवितं | सुग्रीव–शाखामृग–सेवित (√सेव् + क्त, २.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| त्रस्तास् | त्रस्त (√त्रस् + क्त, १.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| हरयो | हरि (१.३) |
| बभूवुर् | बभूवुः (√भू लिट् प्र.पु. बहु.) |
| महौजसौ | महत्–ओजस् (२.२) |
| राघवलक्ष्मणौ | राघव–लक्ष्मण (२.२) |
| तौ | तद् (२.२) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | वृ | ष्य | मू | कं | स | हि | तौ | प्र | या | तौ |
| सु | ग्री | व | शा | खा | मृ | ग | से | वि | तं | तम् |
| त्र | स्ता | स्तु | दृ | ष्ट्वा | ह | र | यो | ब | भू | वु |
| र्म | हौ | ज | सौ | रा | घ | व | ल | क्ष्म | णौ | तौ |