अन्वयः
ततः then, अहम् I, क्रोधसमाविष्टम् overpowered with anger, सम्रब्धम् agitated, उपागतम् arrived, तं भ्रातरम् brother, प्रियकाम्यया to pacify, प्रसादयाञ्चक्रे I appeased.
M N Dutt
Then wishing for my welfare I strove to propitiate my angry brother, wrought up with wrath, who was seated (there).
Summary
'I sought to appease my brother who arrived in an agitated state overpowered with anger.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| क्रोधसमाविष्टं | क्रोध–समाविष्ट (√समा-विश् + क्त, २.१) |
| संरब्धं | संरब्ध (२.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| उपागतम् | उपागत (√उपा-गम् + क्त, २.१) |
| अहं | मद् (१.१) |
| प्रसादयांचक्रे | प्रसादयांचक्रे (√प्र-सादय् उ.पु. ) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| प्रियकाम्यया | प्रिय–काम्या (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | क्रो | ध | स | मा | वि | ष्टं |
| सं | र | ब्धं | त | मु | पा | ग | तम् |
| अ | हं | प्र | सा | द | यां | च | क्रे |
| भ्रा | त | रं | प्रि | य | का | म्य | या |