अन्वयः
सुग्रीवेति saying O Sugriva , पुनः पुनः again and again, विक्रोशमानस्य shouting in distress, मे for me, यदा when, प्रतिवचः response, नास्ति was not heard, ततः then, अहम् I, भृशदुःखितः very sad.
M N Dutt
Then as I again and again cried Sugrīva, Sugrīva, I became exceedingly sorry for not receiving any reply.
Summary
'When there was no response from Sugriva to my repeated call in distress I was very sad.
पदच्छेदः
| विक्रोशमानस्य | विक्रोशमान (√वि-क्रुश् + शानच्, ६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| सुग्रीवेति | सुग्रीव (८.१)–इति (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| प्रतिवचो | प्रतिवचस् (१.१) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| भृशदुःखितः | भृश–दुःखित (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | क्रो | श | मा | न | स्य | तु | मे |
| सु | ग्री | वे | ति | पु | नः | पु | नः |
| य | दा | प्र | ति | व | चो | ना | स्ति |
| त | तो | ऽहं | भृ | श | दुः | खि | तः |