अन्वयः
तात O dear, सुग्रीव Sugriva, येन why, सः अयम् this, बाणः arrow, मया by me, न विसर्जितः not released, कारणम् reason, श्रूयताम् listen to me, क्रोधः anger, व्यपनीयतां च dispel.
M N Dutt
Do you hear, O Sugriva, O worshipful one, why I did not discharge my arrow then.
Summary
'O dear Sugriva dispel your anger and listen to me why I had not released the arrow.
पदच्छेदः
| सुग्रीव | सुग्रीव (८.१) |
| श्रूयतां | श्रूयताम् (√श्रु प्र.पु. एक.) |
| तात | तात (८.१) |
| क्रोधश् | क्रोध (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| व्यपनीयताम् | व्यपनीयताम् (√व्यप-नी प्र.पु. एक.) |
| कारणं | कारण (१.१) |
| येन | यद् (३.१) |
| बाणो | बाण (१.१) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| मया | मद् (३.१) |
| स | तद् (१.१) |
| विसर्जितः | विसर्जित (√वि-सर्जय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सु | ग्री | व | श्रू | य | तां | ता | तः |
| क्रो | ध | श्च | व्य | प | नी | य | ताम् |
| का | र | णं | ये | न | बा | णो | ऽयं |
| न | म | या | स | वि | स | र्जि | तः |