अन्वयः
राम Rama, भावितात्मनाम् sacred souls, तेषाम् मुनीनाम् to those sages, ये whoever, प्रणमन्ति offer obeisance, तेषाम् to them, शरीरे in body, किञ्चित् not even a little, अशुभम् inauspicious, न दृश्यते will not be seen.
M N Dutt
There resteth no sin in their persons, O Rāma, who bow to those self-controlled Saints.
Summary
'O Rama, nothing inauspicious happens to them who offer obeisance to those highly spiritual sacred sages.'
पदच्छेदः
| प्रणमन्ति | प्रणमन्ति (√प्र-नम् लट् प्र.पु. बहु.) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| ये | यद् (१.३) |
| तेषाम् | तद् (६.३) |
| ऋषीणां | ऋषि (६.३) |
| भावितात्मनाम् | भावितात्मन् (६.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| तेषाम् | तद् (६.३) |
| अशुभं | अशुभ (१.१) |
| किंचिच् | कश्चित् (१.१) |
| छरीरे | शरीर (७.१) |
| राम | राम (८.१) |
| दृश्यते | दृश्यते (√दृश् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | ण | म | न्ति | हि | ये | ते | षा |
| मृ | षी | णां | भा | वि | ता | त्म | नाम् |
| न | ते | षा | म | शु | भं | किं | चि |
| च्छ | री | रे | रा | म | दृ | श्य | ते |