पदच्छेदः
| यत् | यद् (२.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| आत्थ | आत्थ (√अह् लिट् म.पु. ) |
| नरश्रेष्ठ | नर–श्रेष्ठ (८.१) |
| तद् | तद् (१.१) |
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| नात्र | न (अव्ययः)–अत्र (अव्ययः) |
| संशयः | संशय (१.१) |
| प्रतिवक्तुं | प्रतिवक्तुम् (√प्रति-वच् + तुमुन्) |
| प्रकृष्टे | प्रकृष्ट (√प्र-कृष् + क्त, ७.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नापकृष्टस् | न (अव्ययः)–अपकृष्ट (√अप-कृष् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शक्नुयात् | शक्नुयात् (√शक् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्त्व | मा | त्थ | न | र | श्रे | ष्ठ |
| त | दे | वं | ना | त्र | सं | श | यः |
| प्र | ति | व | क्तुं | प्र | कृ | ष्टे | हि |
| ना | प | कृ | ष्ट | स्तु | श | क्नु | यात् |