त्वं हि दृष्टार्थतत्त्वज्ञः प्रजानां च हिते रतः ।
कार्यकारणसिद्धौ ते प्रसन्ना बुद्धिरव्यया ॥
त्वं हि दृष्टार्थतत्त्वज्ञः प्रजानां च हिते रतः ।
कार्यकारणसिद्धौ ते प्रसन्ना बुद्धिरव्यया ॥
अन्वयः
त्वम् you, दृष्टार्थतत्त्वज्ञः wise man given to truth and righteousness, प्रजानाम् people's, हिते wellbeing, रतश्च remain devoted, अव्यया knowing, बुद्धि: sound intellect, कार्यकारणसिद्धौ know for certain about cause and effect, प्रसन्ना is pleasant.Summary
'You are a wise man given to truth and righteousness.You remain devoted to people's wellbeing. As you know for certain about cause and effect your intellect is sound and words pleasant.पदच्छेदः
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| दृष्टार्थतत्त्वज्ञः | दृष्टार्थ–तत्त्व–ज्ञ (१.१) |
| प्रजानां | प्रजा (६.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| हिते | हित (७.१) |
| रतः | रत (√रम् + क्त, १.१) |
| कार्यकारणसिद्धौ | कार्य–कारण–सिद्धि (७.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| प्रसन्ना | प्रसन्न (√प्र-सद् + क्त, १.१) |
| बुद्धिर् | बुद्धि (१.१) |
| अव्यया | अव्यय (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वं | हि | दृ | ष्टा | र्थ | त | त्त्व | ज्ञः |
| प्र | जा | नां | च | हि | ते | र | तः |
| का | र्य | का | र | ण | सि | द्धौ | ते |
| प्र | स | न्ना | बु | द्धि | र | व्य | या |