पदच्छेदः
| शार्दूलेनामिषस्यार्थे | शार्दूल (३.१)–आमिष (६.१)–अर्थ (७.१) |
| मृगराजं | मृग–राज् (२.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| हतम् | हत (√हन् + क्त, २.१) |
| अर्चितं | अर्चित (√अर्चय् + क्त, २.१) |
| सर्वलोकस्य | सर्व–लोक (६.१) |
| सपताकं | स (अव्ययः)–पताका (२.१) |
| सवेदिकम् | स (अव्ययः)–वेदिका (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शा | र्दू | ले | ना | मि | ष | स्या | र्थे |
| मृ | ग | रा | जं | य | था | ह | तम् |
| अ | र्चि | तं | स | र्व | लो | क | स्य |
| स | प | ता | कं | स | वे | दि | कम् |