पदच्छेदः
| नागहेतोः | नाग–हेतु (५.१) |
| सुपर्णेन | सुपर्ण (३.१) |
| चैत्यम् | चैत्य (२.१) |
| उन्मथितं | उन्मथित (√उत्-मथ् + क्त, २.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| अवष्टभ्यावतिष्ठन्तं | अवष्टभ्य (√अव-स्तम्भ् + ल्यप्)–अवतिष्ठत् (√अव-स्था + शतृ, २.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| धनुरूर्जितम् | धनुस्–ऊर्जित (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | ग | हे | तोः | सु | प | र्णे | न |
| चै | त्य | मु | न्म | थि | तं | य | था |
| अ | व | ष्ट | भ्या | व | ति | ष्ठ | न्तं |
| द | द | र्श | ध | नु | रू | र्जि | तम् |