पदच्छेदः
| रामं | राम (२.१) |
| रामानुजं | राम–अनुज (२.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| भर्तुश् | भर्तृ (६.१) |
| चैवानुजं | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–अनुज (२.१) |
| शुभा | शुभ (१.१) |
| तान् | तद् (२.३) |
| अतीत्य | अतीत्य (√अति-इ + ल्यप्) |
| समासाद्य | समासाद्य (√समा-सादय् + ल्यप्) |
| भर्तारं | भर्तृ (२.१) |
| निहतं | निहत (√नि-हन् + क्त, २.१) |
| रणे | रण (७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | मं | रा | मा | नु | जं | चै | व |
| भ | र्तु | श्चै | वा | नु | जं | शु | भा |
| ता | न | ती | त्य | स | मा | सा | द्य |
| भ | र्ता | रं | नि | ह | तं | र | णे |