यद्यप्रियं किंचिदसंप्रधार्य; कृतं मया स्यात्तव दीर्घबाहो ।
क्षमस्व मे तद्धरिवंश नाथ; व्रजामि मूर्ध्ना तव वीर पादौ ॥
यद्यप्रियं किंचिदसंप्रधार्य; कृतं मया स्यात्तव दीर्घबाहो ।
क्षमस्व मे तद्धरिवंश नाथ; व्रजामि मूर्ध्ना तव वीर पादौ ॥
अन्वयः
दीर्घबाहो O longarmed one, हरिवंशनाथ chief of monkey clan, वीर warrior, असम्प्रधार्य unknowingly, मया by me, तव to you, अप्रियम् inconsiderately, किञ्चित् even a little, कृतं स्याद्यदि if done, मे mine, तत् that, क्षमस्व may pardon, मूर्ध्ना by my head, तव your, पादो feet, व्रजामि I reach.M N Dutt
you of long arms, O lord of monkeys, if I have offended you in any way, do you forgive me, after ascertaining my crime.Summary
'O longarmed chief of the monkey clan O warrior pardon me any wrong done unknowingly, inconsiderately. I touch your feet with my head.'पदच्छेदः
| यद्य् | यदि (अव्ययः) |
| अप्रियं | अप्रिय (१.१) |
| किंचिद् | कश्चित् (१.१) |
| असंप्रधार्य | अ (अव्ययः)–सम्प्रधार्य (√सम्प्र-धारय् + ल्यप्) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| स्यात् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| दीर्घबाहो | दीर्घ–बाहु (८.१) |
| क्षमस्व | क्षमस्व (√क्षम् लोट् म.पु. ) |
| मे | मद् (६.१) |
| तद्धरिवंशनाथ | तद् (२.१)–हरि–वंश–नाथ (८.१) |
| व्रजामि | व्रजामि (√व्रज् लट् उ.पु. ) |
| मूर्ध्ना | मूर्धन् (३.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| वीर | वीर (८.१) |
| पादौ | पाद (२.२) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द्य | प्रि | यं | किं | चि | द | सं | प्र | धा | र्य |
| कृ | तं | म | या | स्या | त्त | व | दी | र्घ | बा | हो |
| क्ष | म | स्व | मे | त | द्ध | रि | वं | श | ना | थ |
| व्र | जा | मि | मू | र्ध्ना | त | व | वी | र | पा | दौ |