जनं च पश्यसीमं त्वं कस्माच्छोकाभिपीडितम् ।
प्रहृष्टमिव ते वक्त्रं गतासोरपि मानद ।
अस्तार्कसमवर्णं च लक्ष्यते जीवतो यथा ॥
जनं च पश्यसीमं त्वं कस्माच्छोकाभिपीडितम् ।
प्रहृष्टमिव ते वक्त्रं गतासोरपि मानद ।
अस्तार्कसमवर्णं च लक्ष्यते जीवतो यथा ॥
अन्वयः
मानद revered self, गतासोरपि even though you are bereft of life, ते your, अस्तार्कसमवर्णम् bears the colour of the setting Sun, वक्त्रम् face, जीवतो यथा the same colour when you were alive, इह here, प्रहृष्टम् happy, दृश्यते appears.M N Dutt
O conferrer of honours, your countenance looks as if beaming with joy; although you are dead, and you appearest as if alive, having the hue of the setting Sun.Summary
'O revered self even though you are bereft of life, your face looks cheerful. It carries the colour of the setting Sun, and looks the same when you were alive.पदच्छेदः
| जनं | जन (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| पश्यसीमं | पश्यसि (√दृश् लट् म.पु. )–इदम् (२.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| कस्माच् | क (५.१) |
| छोकाभिपीडितम् | शोक–अभिपीडित (√अभि-पीडय् + क्त, २.१) |
| प्रहृष्टम् | प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| वक्त्रं | वक्त्र (१.१) |
| गतासोर् | गतासु (६.१) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| मानद | मानद (८.१) |
| अस्तार्कसमवर्णं | अस्त–अर्क–सम–वर्ण (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| लक्ष्यते | लक्ष्यते (√लक्षय् प्र.पु. एक.) |
| जीवतो | जीवत् (√जीव् + शतृ, ६.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | नं | च | प | श्य | सी | मं | त्वं | क | स्मा | च्छो | का |
| भि | पी | डि | तम् | प्र | हृ | ष्ट | मि | व | ते | व | क्त्रं |
| ग | ता | सो | र | पि | मा | न | द | अ | स्ता | र्क | स |
| म | व | र्णं | च | ल | क्ष्य | ते | जी | व | तो | य | था |