अन्वयः
लक्ष्मण Lakshmana, हृतदारश्च with lost wife, महतः from the mighty, राज्यात् from the kingdom, च्युतश्च dethroned, अहं तु I am even, क्लिन्नम् overflowed with water, नदीकूलम् इव like the bank of river, अवसीदामि I am sinking.
M N Dutt
And I am, O Laksmana, waning every day like to the banks of a river, being separated from my spouse and deprived of my vast kingdom.
Summary
'O Lakshmana I have lost my wife. I have been dethroned from the mighty kingdom. I am sinking like a river bank overflowed.
पदच्छेदः
| अहं | मद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| हृतदारश् | हृत (√हृ + क्त)–दार (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| राज्याच् | राज्य (५.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| महतश् | महत् (५.१) |
| च्युतः | च्युत (√च्यु + क्त, १.१) |
| नदीकूलम् | नदी–कूल (१.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| क्लिन्नम् | क्लिन्न (√क्लिद् + क्त, १.१) |
| अवसीदामि | अवसीदामि (√अव-सद् लट् उ.पु. ) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | हं | तु | हृ | त | दा | र | श्च |
| रा | ज्या | च्च | म | ह | त | श्च्यु | तः |
| न | दी | कू | ल | मि | व | क्लि | न्न |
| म | व | सी | दा | मि | ल | क्ष्म | ण |