अन्वयः
लक्ष्मणः Lakshmana, गृहीतप्रहरणान् seized weapons, तान् them, हरीन् monkeys, दृष्ट्वा on seeing, बह्विन्धनः lots of firewood, अनलः इव like fire, द्विगुणम् doubled, क्रुद्धः angry, बभूव became.
M N Dutt
And observing them armed, Lakṣmaṇa was doubly inflamed with anger like to fire kindled with fuels.
Summary
On seeing the monkeys wielding weapons, Lakshmana's anger doubled like logs of firewood put to burning.
पदच्छेदः
| तान् | तद् (२.३) |
| गृहीतप्रहरणान् | गृहीत (√ग्रह् + क्त)–प्रहरण (२.३) |
| हरीन् | हरि (२.३) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| लक्ष्मणः | लक्ष्मण (१.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| द्विगुणं | द्विगुण (२.१) |
| क्रुद्धो | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| बह्विन्धन | बहु–इन्धन (१.१) |
| इवानलः | इव (अव्ययः)–अनल (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ता | न्गृ | ही | त | प्र | ह | र | णा |
| न्ह | री | न्दृ | ष्ट्वा | तु | ल | क्ष्म | णः |
| ब | भू | व | द्वि | गु | णं | क्रु | द्धो |
| ब | ह्वि | न्ध | न | इ | वा | न | लः |