अन्वयः
मम my, लक्ष्मणात् from Lakshmana, त्रासः fear, नास्ति खलु not expected, राघवादपि even from Rama, न not, अस्थानकोपितम् enraged without reason, मित्रम् friend, सम्भ्रमम् misgivings, जनयत्येव will create.
M N Dutt
I do not fear Lakşmaņa or Rāghava; but friends enraged without any cause do invariable produce fear.
Summary
'I have no fear either from Lakshmana or from Rama. However, when a friend is enraged without reason, it creates misgivings.
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| खल्वस्ति | खलु (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| मम | मद् (६.१) |
| त्रासो | त्रास (१.१) |
| लक्ष्मणान्नापि | लक्ष्मण (५.१)–न (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| राघवात् | राघव (५.१) |
| मित्रं | मित्र (२.१) |
| त्व् | तु (अव्ययः) |
| अस्थानकुपितं | अस्थान–कुपित (√कुप् + क्त, २.१) |
| जनयत्येव | जनयति (√जनय् लट् प्र.पु. एक.)–एव (अव्ययः) |
| सम्भ्रमम् | सम्भ्रम (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | ख | ल्व | स्ति | म | म | त्रा | सो |
| ल | क्ष्म | णा | न्ना | पि | रा | घ | वात् |
| मि | त्रं | त्व | स्था | न | कु | पि | तं |
| ज | न | य | त्ये | व | सं | भ्र | मम् |