तव हि मुखमिदं निरीक्ष्य कोपा;त्क्षतजनिभे नयने निरीक्षमाणाः ।
हरिवरवनिता न यान्ति शान्तिं; प्रथमभयस्य हि शङ्किताः स्म सर्वाः ॥
तव हि मुखमिदं निरीक्ष्य कोपा;त्क्षतजनिभे नयने निरीक्षमाणाः ।
हरिवरवनिता न यान्ति शान्तिं; प्रथमभयस्य हि शङ्किताः स्म सर्वाः ॥
अन्वयः
हरिवरवनिताः wives of foremost of monkeys, तव your, इदम् this, मुखम् face, निरीक्ष्य on seeing, कोपात् from anger, क्षतजनिभे resembling blood, नयने eyes, निरीक्षमाणाः looking at the eyes, शान्तिम् peace, न यान्ति not able to, सर्वाः all, प्रथमभयस्य of the earlier fear, शङ्कितास्तु suspecting.M N Dutt
Seeing this your face wrought up with wrath, and your eyes appearing like red sores, the wives of the best of monkeys experience no peace, and they are agitated by the fear that exercised them of late.Summary
'Looking at your angry countenance with bloodred eyes, the wives of the foremost of monkeys are frightened by the possibility of similar danger of the past (of Vali's death) and do not find peace of mind.'इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे पञ्चत्रिंशस्सर्गः॥Thus ends the thirtyfifth sarga in Kishkindakanda of the first epic, the Holy Ramayana composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तव | त्वद् (६.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मुखम् | मुख (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| निरीक्ष्य | निरीक्ष्य (√निः-ईक्ष् + ल्यप्) |
| कोपात् | कोप (५.१) |
| क्षतजनिभे | क्षतज–निभ (२.२) |
| नयने | नयन (२.२) |
| निरीक्षमाणाः | निरीक्षमाण (√निः-ईक्ष् + शानच्, १.३) |
| हरिवरवनिता | हरि–वर–वनिता (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| यान्ति | यान्ति (√या लट् प्र.पु. बहु.) |
| शान्तिं | शान्ति (२.१) |
| प्रथमभयस्य | प्रथम–भय (६.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| शङ्किताः | शङ्कित (√शङ्क् + क्त, १.३) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| सर्वाः | सर्व (१.३) |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | व | हि | मु | ख | मि | दं | नि | री | क्ष्य | को | पा | |
| त्क्ष | त | ज | नि | भे | न | य | ने | नि | री | क्ष | मा | णाः |
| ह | रि | व | र | व | नि | ता | न | या | न्ति | शा | न्तिं | |
| प्र | थ | म | भ | य | स्य | हि | श | ङ्कि | ताः | स्म | स | र्वाः |