ऋक्षकोटिसहस्राणि गोलाङ्गूलशतानि च ।
अद्य त्वामुपयास्यन्ति जहि कोपमरिंदम ।
कोट्योऽनेकास्तु काकुत्स्थ कपीनां दीप्ततेजसाम् ॥
ऋक्षकोटिसहस्राणि गोलाङ्गूलशतानि च ।
अद्य त्वामुपयास्यन्ति जहि कोपमरिंदम ।
कोट्योऽनेकास्तु काकुत्स्थ कपीनां दीप्ततेजसाम् ॥
अन्वयः
अरिन्दम subduer of enemies, काकुत्स्थ Lakshmana, अद्य now, ऋक्षकोटिसहस्राणि thousands of crores of bears, गोलाङ्गूलशतानि hundreds of golangulas (monkeys with long tails like those of cows), दीप्ततेजसाम् of fiery spirit, कपीनाम् of monkeys, अनेकाः many, कोट्यः crores, त्वाम् your, उपयास्यन्ति will attend on you, कोपम् anger, जहि give up.M N Dutt
This very day billions of bears and thousands of golangulas as well as innumerable Koțis of monkeys flaming in energy shall join you. Therefore, O subduer of enemies, banish your anger.पदच्छेदः
| ऋक्षकोटिसहस्राणि | ऋक्ष–कोटि–सहस्र (१.३) |
| गोलाङ्गूलशतानि | गोलाङ्गूल–शत (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| त्वाम् | त्वद् (२.१) |
| उपयास्यन्ति | उपयास्यन्ति (√उप-या लृट् प्र.पु. बहु.) |
| जहि | जहि (√हा लोट् म.पु. ) |
| कोपम् | कोप (२.१) |
| अरिंदम | अरिंदम (८.१) |
| कोट्यो | कोटि (१.३) |
| ऽनेकास् | अनेक (१.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| काकुत्स्थ | काकुत्स्थ (८.१) |
| कपीनां | कपि (६.३) |
| दीप्ततेजसाम् | दीप्त (√दीप् + क्त)–तेजस् (६.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋ | क्ष | को | टि | स | ह | स्रा | णि | गो | ला | ङ्गू | ल |
| श | ता | नि | च | अ | द्य | त्वा | मु | प | या | स्य | न्ति |
| ज | हि | को | प | म | रिं | द | म | को | ट्यो | ऽने | का |
| स्तु | का | कु | त्स्थ | क | पी | नां | दी | प्त | ते | ज | साम् |