अन्वयः
रामः Rama, महात्मनः great soul, तस्य सुग्रीवस्य that Sugriva's, तत् वचनम् those words, श्रुत्वा having heard, अथ then, हरिं प्रति seeing Sugriva, स्मितपूर्वम् smiling gently, प्रत्युवाच replied.
M N Dutt
When the high-souled Sugrīva had said this, Lakşmaņa became well pleased and he spoke from love,
Summary
Having heard the great Sugriva, Rama replied with a gentle smile:
पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| ब्रुवाणस्य | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, ६.१) |
| सुग्रीवस्य | सुग्रीव (६.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
| अभवल्लक्ष्मणः | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.)–लक्ष्मण (१.१) |
| प्रीतः | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| प्रेम्णा | प्रेमन् (३.१) |
| चेदम् | च (अव्ययः)–इदम् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | ति | त | स्य | ब्रु | वा | ण | स्य |
| सु | ग्री | व | स्य | म | हा | त्म | नः |
| अ | भ | व | ल्ल | क्ष्म | णः | प्री | तः |
| प्रें | णा | चे | द | मु | वा | च | ह |