प्रनष्टा श्रीश्च कीर्तिश्च कपिराज्यं च शाश्वतम् ।
रामप्रसादात्सौमित्रे पुनः प्राप्तमिदं मया ॥
प्रनष्टा श्रीश्च कीर्तिश्च कपिराज्यं च शाश्वतम् ।
रामप्रसादात्सौमित्रे पुनः प्राप्तमिदं मया ॥
अन्वयः
सौमित्रे O Saumitri, प्रणष्टा lost from me, श्री:च prosperity also, कीर्ति: च and fame, शाश्वतम् permanent, कपिराज्यं च and the kingdom of monkeys, इदम् this, रामप्रसादात् by the grace of Rama, मया by me, पुनः again, प्राप्तम् has been regained.M N Dutt
You son to Sumitrā, by the favour of Rāma have I received back my lost luck, my fame, and this eternal monarchy of the monkeys.Summary
'O Saumitri my prosperity, fame and the permanent sovereignty of vanaras had been lost. It was regained by the grace of Rama.पदच्छेदः
| प्रनष्टा | प्रनष्ट (√प्र-नश् + क्त, १.१)–प्रनष्ट (√प्र-नश् + क्त, १.१) |
| श्रीश् | श्री (१.१)–श्री (१.१) |
| च | च (अव्ययः)–च (अव्ययः) |
| कीर्तिश् | कीर्ति (१.१)–कीर्ति (१.१) |
| च | च (अव्ययः)–च (अव्ययः) |
| कपिराज्यं | कपि–राज्य (१.१)–कपि–राज्य (१.१) |
| च | च (अव्ययः)–च (अव्ययः) |
| शाश्वतम् | शाश्वत (१.१)–शाश्वत (१.१) |
| रामप्रसादात् | राम–प्रसाद (५.१) |
| सौमित्रे | सौमित्रि (८.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| प्राप्तम् | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.१) |
| इदं | इदम् (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | न | ष्टा | श्री | श्च | की | र्ति | श्च |
| क | पि | रा | ज्यं | च | शा | श्व | तम् |
| रा | म | प्र | सा | दा | त्सौ | मि | त्रे |
| पु | नः | प्रा | प्त | मि | दं | म | या |